पिछले कई दिनों से


पिछले कई दिनों से 

वही गीत है जहन में 

जो तुम थी गुनगुनाती 

वो संगीत है जहन में 

जिसे सुनकर आज भी मैं 

हूँ ज़िन्दगी से बावस्ता 

हर लफ़्ज़ कह रहा हो 

मानो तेरा मेरा रिश्ता 

ख़्वाब हो जाएगा हकीकत 

उम्मीद है जहन में 

पिछले कई दिनों से 

वही गीत है जहन में 


तमाम तेरे जज़्बे 

इस गीत में बयां है 

इस गीत मे ही जैसे 

तेरा मेरा आशियाँ है 

जो दूर रह के भी है मेरा 

वो मनमीत है जहन में 

पिछले कई दिनों से 

वही गीत है जहन में 


एक अरसा हो गया है 

आज तुमको देखे 

ये गीत कह रहा है 

बिन बोले बिना कह के 

तेरी खुशबू हर तरफ़ है 

तेरी प्रीत है जहन में 

पिछले कई दिनों से 

वही गीत है जहन में 


वो मुलाकात तुमसे पहली 

वो शाम थी सुनहली 

पुरवाई पूछती थी 

जैसे कोई पहेली 

वो उलझे उलझे गेसू 

तेरी दीद है जहन में 

पिछले कई दिनों से 

वही गीत है जहन में 


चाँद कहता है बात तेरी 

लगती है रात मेरी 

दरख्तों से झाँकता है 

वो लम्हे आंकता है 

वो पल उजले चाँदनी से 

जो गए बीत, है जहन मैं 

पिछले कई दिनों से 

वही गीत है जहन में 


जाने ये है उम्मीद कैसी 

जो बिल्कुल है तेरे जैसी 

वो मौसम जब हम मिले थे 

तेरे साथ संग चले थे 

जुदा हमसे तुम हुए क्यों 

वो रीत है जहन में 

पिछले कई दिनों से 

वही गीत है जहन में 


हल्की सी मुस्कुराहट 

मासूम सी शरारत 

एक रोज़ तुम मिलोगे

यक़ी है इसी हसरत मे

चाहत की रोशनी में 

मेरी जीत है जहन में 

पिछले कई दिनों से 

वही गीत है जहन में 

पिछले कई दिनों से


प्रीती अरोरा 

मुंबई महाराष्ट्र








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