इसके अलावा पत्रिका की सहायक प्रधान संपादक
किरण बाला जी की रंगों के मनोविज्ञान पर आधारित पुस्तक *रंगों से संवाद तक* का लोकार्पण भी किया गया। विमोचन समारोह में उपस्थित सभी ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की। किरण बाला जी ने बताया कि रंग मात्र बाहरी सतह पर दिखाई देनी वाली परत या फिर अलंकरण की अनुभूति तक ही नहीं सीमित हैं,बल्कि रंग तो अंतर्मन की गहराई में छिपे होते हैं। जिसने रंगों से संवाद करने की प्रक्रिया को जान लिया समझो उसने स्वयं को जान लिया। अपने अंतर्मन में छिपी हुई रहस्यात्मक दुनिया को समझने में पारंगत हो गया।
हम सभी ये सोचते हैं कि हम रंगों को चुनते हैं किंतु सच तो ये है कि रंग हमें चुनते हैं। यह पुस्तक आपको एक ऐसी यात्रा पर ले जाने का प्रयास करती है जहाँ आप अपनी अंतरात्मा की तह तक पहुँच सकते हैं।
रंगों द्वारा अभिव्यक्ति कला चिकित्सा के रूप में व्यक्ति को मानसिक शांति और संबल प्रदान करती है।
यह पुस्तक उन सभी के लिए है जो कला की दुनिया में आना तो चाहते हैं किंतु थोड़ा यह सोचकर हिचकिचाते भी हैं । लेखिका ने इसी संकोच को समाप्त करने के लिए अपने जीवन में घटित अनुभवों द्वारा बेहद सरल तरीके से अपने चित्रों के माध्यम से विभिन्न उदाहरण देते हुए समझाने का प्रयास किया है।
उम्मीद है कि उनकी यह पुस्तक उनके जीवन में बदलाव अवश्य लाएगी जो जीवन में निराशा से घिरे हुए हैं और नकारात्मकता की तरफ कदम बढ़ा चुके हैं।
किताब के विमोचन के अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य नगेंद्र सिंह, साहित्य सरोज पत्रिका के संपादक अखंड गहमरी उपस्थित रहे।
पूजा सरोच
चंडीगढ़
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