राजू- हैलो? - कौन
शोभा - जी हम शोभा।
राजू- हा हा बोलो शोभा क्या बात है ।
शोभा - आप कहा है । कब तक घर आयेगे।
राजू - अरे हम क्या बताएं, अभी तो हम दिल्ली में ही हैं। गाड़ी बस सब बंद है । कैसे घर पर आए गाड़ी चलने लगेगी तो मैं आ जाऊंगा । मेरी चिंता मत करो बोलो क्या बात है।
शोभा - बात कुछ नहीं हैजी, कुछ पैसों की जरूरत थी। घर में राशन पानी सब खत्म है। एक पैसा पास में नहीं है कि सामान खरिद सकु , कुछ पैसा भेज देते तो अपनी जरूरत के सामान पूरी करती।
राजू - ठीक है मैं पैसो के लिऐ सर से बात करता हूं ।देखे क्या कहते हैं। कुछ पैसा है उनके पास मेरा बचा हुआ जैसा होगा हम फोन करते हैं। और सब ठीक है ना।
शोभा - क्या ठीक है जी उधर मां बीमार है । एक हफ्ता से उनकी दवा बंद है । पैसा नहीं है कि दवा ले आउ रात दिन खासती रहती है । सांस बराबर फुलतारहता है । क्या बताऊं मैं बहुत परेशान हूं। किसी तरह पड़ोस वाली चाची से ₹500 रूपया उधार ले आई हूं । बच्चों के लिए ब्रेड चावल खरीद कर ले आई किसी तरह चार-पांच दिन चला , बच्चे रो रहे हैं क्या करें कुछ समझ में नहीं आता ।हमने माड चावल बनाकर खिला रहे हैं।
राजू--अच्छा ठीक है तुम परेशान मत हो मैं कोई इंतजाम करता हूं।
राजू - हैलो ? नमस्ते सर
सर - हैलो ? कौन
राजू - हम है सर राजकुमार
सर- कौन राजकुमार
राजू- राजकुमार ,राजू सर
सर- हा बोलो क्या बात है ।
राजू- सर हमको पैसों की बहुत सख्त जरूरत है।
मेरे घर में चावल का एक दाना भी नहीं है सर मेरे बाल बच्चे भुख से तड़प रहे हैं।
मेरी मां बहुत बीमार है उसकी दवा एक हफ्ते से नहीं आ रहा है सर, हम बहुत परेशान हैं कुछ पैसे दे देते तो मैं घर पर भेज देता सर?
सर - क्या पैसों का पेड़ है मेरे पास जब चाहा तोड़ लिया मेरे पास पैसे अभी है ।
राजू - अरे सर मैं अपना पैसा मांग रहा हूं जो मैं आपकी दीवार की रंगाई पुताई किया था । हमारा पैसा तो दे दीजिए सर-
सर- ठीक है ठीक है बाद में ले लेना मेरे पास इस वक्त पैसा नहीं है।
राजू - ऐसा मत बोलिए सर , मेरे परिवार भूख से तड़प रहा है कोई मदद करने वाला नहीं है। छोटे-छोटे मेरे बच्चे हैं। उनको खाने के लाले पड़े हुए हैं । मैं आपके हाथ पांव पडता हूं सर मेरी बात मान लीजिए। हमारे बाल बच्चे भूखे मर जाएंगे सर?
सर- मैं एक बार कह दिया तो कह दिया तुम मजदूरों का यही हाल है काम धाम करते नहीं पैसों के लिए डिमांड कर देते हो चलो फोन रखो आगे से बात मत करना।
राजू -अब मैं क्या करूं कुछ समझ में नहीं आता ।मैं किसके आगे हाथ फैलाऊ यहां अजनबी शहर मे यहां हमें कौन पैसा देगा ,हम भी एक माह से बैठे हैं । ना कोई काम मिल रहा है । ना खाना पानी मिल रहा है । मेरा दिल घबरा रहा है कि मैं क्या करूं कहां से पैसे भेजे कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
शोभा-- क्या हुआ अभी तक फोन नहीं आया मैं देखती हूं फोन करके।
शोभा - हैलो?
राजू - हां बोलो शोभा क्या बात है।
शोभा - क्या हुआ कुछ पैसों का इंतजाम हुआ।
राजू - हमको माफ कर दो शोभा पैसो का इंतजाम नहीं हो पाया ,हम तुम सबो के लिए कुछ नहीं कर पाए ।अब हम इस दुनिया से जा रहे हैं । शोभा हम जहर पी लिया है मां को समझाना बाल बच्चों का ध्यान रखना। जो मैं अपने परिवार के लिए कुछ नहीं कर पाया। मैं एकदम असहाय हो गया हूं । शोभा हो सके तो हमें माफ करना।
शोभा- नहीं नहीं आप ऐसा नहीं कर सकते हमें कुछ नहीं चाहिए ।बस आप घर वापस आ जाइए हम किसके सहारे जिंदगी गुजारेंगे , बाल बच्चों का भविष्य क्या होगा । नहीं नहीं आप ऐसा नहीं कर सकते हम भी आपके बगैर जिंदा नहीं रह पाऊंगी।
राजू - हमें माफ कर दो शोभा बस अब मैं जा रहा हूं ।हमें माफ करना हमें माफ करना शोभा मां का ख्याल रखना। एक तरफ राजू का शरीर लुढ़क जाता है ।और इस दुनिया से अलविदा कह जाता है । वाह रे गरीबी एक मजदूर की जिंदगी तबाह कर दी।
उपेंद्र अजनबी
सेवराई गाजीपुर
मो -7985797683
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