प्रेमगीत 2
मेरा प्रेम- मेरी प्रीत
प्रेम प्रीत प्यार ये शब्द नहीं मात्र
वरन हृदय -तल से उफनते हुए अहसास हैं
प्रेम की परिभाषा खोजने बैठी तो
हृदय के गहन कक्ष में जा पहुंचीं
वहां बहुत अंधेरा था
* आंखें बंद करके सोचने बैठी तो
एक चमकीली रौशनी से तुम मुस्कुरा रहे थे
मुझे प्रेम की परिभाषा मिल गई थी शायद?
पर फिर एक संशय सा हुआ
पानी का बुलबुला सा उठा
सोचा इतनी आसानी से कहां दूर होगा मेरा संशय?
और फिर बैठ गई ध्यानस्थ होकर ये निर्णय लेकर
कि अब तो तब ही उठूंगी जब पा जाऊंगी
अपने हर सवालों के जवाब
और प्रेम प्रीत प्यार की सच्ची परिभाषा
संसार से दूर,सबसे दूर फिर डूब जाती हूं
विचारों के महासागर में
बहुत गहरे बहुत गहरे डूबती जाती हूं
बंद आंखों से देखने की कोशिश करती हूं जबरदस्ती तो
मेरी आंखों के कोरों की नमी में तुम फिर मुस्कुरा रहे थे
पर फिर अनदेखा किया तुम्हें
और फिर अपनी सांसों के आरोह अवरोह को साधा तो
मेरी हर सांस तुम्हें ही पुकार रही थी
मेरी धड़कनें तुम्हारा ही नाम ले रही थी
अजीब असमंजस में फंसी थी मेरी हृदय नैया
प्रेम प्रीत प्यार का पहला अक्षर पहला अहसास
तुम से शुरू होकर तुम तक ही जाता है
मेरे होंठों की हंसी में तुम
मेरी आंखों की नमी में तुम
मेरी सुबह की पहली किरण में तुम
मेरी हर खुशी में तुम
मेरी हार में तुम,मेरी जीत में तुम
मेरे सपनों में तुम
मेरी हर कहानी के राजकुमार हो तुम
मेरे मरीज़ भी तुम,मेरे रोग भी तुम
मेरी दवा भी तुम
मेरा सजना भी तुम
मेरा संवारना भी तुम
मेरे जीवन का प्रेमगीत भी तुम
संगीत भी तुम
मेरे घंघरू की आवाज भी तुम
मेरे सुर की तान भी तुम
मेरे मन की आवाज़ भी तुम
मेरे तन की तरुणाई भी तुम
*
मेरे रोम रोम में तुम
मेरे जीवन तुम , मेरी आत्मा में तुम
बाहर तुम,भीतर तुम
मेरी लेखनी में तुम, मेरे शब्दों में तुम
सब जगह तुम ही तुम
घबराकर खोलती हूं आंखें
* धड़कनों को संभालती हूं
अपने विचारों पर लगाती हूं अंकुश
मेरा प्रेम,मेरी प्रीत,मेरा प्यार
सब-कुछ तुम ही हो
पर इस आत्मबोध को स्वयं से ही छुपाती हूं
क्योंकि इस परम पावन प्यारे
अहसास को किसी से बांट नहीं सकती तो
अपने हृदय कमल में तुम को बंद
करके जीवन का मोक्ष पाती हूं
क्या देह परमात्मा का वर्णन कर सकता है?
मेरे लिए तो तुम ही परमात्मा की
ओर ले जाने वाली प्रथम सीढ़ी हो
और परमात्मा को पाने वाली
अंतिम सीढ़ी भी तुम ही हो
मेरा प्रेम,मेरी प्रीत,मेरा प्यार
तुम ही हो- तुम ही हो, तुम ही हो
वन्दना "वामा" शिमला हिमाचल
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15 फरवरी से 28 फरवरी गीत/गजल/लेख/मुक्तक लेखन विषय- होली
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