स्वास्थ्य ही सुख का आधार है

महाकवि कालिदास का यह अमर वचन मानव जीवन का शाश्वत सत्य है। इसका अर्थ है—यह शरीर ही समस्त कर्तव्यों, पुरुषार्थों और जीवन-साधना का प्रथम साधन है। जब शरीर स्वस्थ होता है, तभी मन प्रसन्न रहता है, बुद्धि निर्मल होती है और जीवन सार्थक बनता है। इसी भाव को हमारे ऋषि-मुनियों ने एक अन्य वाक्य में व्यक्त किया—"आरोग्यं परमं भाग्यं, स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्।" अर्थात आरोग्य सबसे बड़ा सौभाग्य है और स्वास्थ्य सभी सफलताओं की आधारशिला है।

हमारे लोकजीवन में भी यही अनुभव बार-बार दोहराया गया है—"पहिला सुख निरोगी काया।" यह केवल कहावत नहीं, बल्कि पीढ़ियों की तपस्या से निकला जीवन-दर्शन है। धन, वैभव, पद और प्रतिष्ठा यदि स्वास्थ्य के बिना हों, तो वे ऊँट के मुँह में जीरा सिद्ध होते हैं। मनुष्य चाहे आसमान के तारे तोड़ने का स्वप्न देखे, किन्तु यदि उसका शरीर रोगग्रस्त है, तो उसकी सारी महत्वाकांक्षाएँ धरी की धरी रह जाती हैं।

आज विज्ञान ने जीवन को सरल बनाया है, परन्तु उसी के साथ मनुष्य ने अपनी दिनचर्या को इतना कृत्रिम बना लिया है कि प्रकृति से उसका संबंध टूटता जा रहा है। प्रातःकाल की शीतल वायु, सूर्य की स्वर्णिम किरणें, पक्षियों का मधुर कलरव और खुला आकाश अब काँच की खिड़कियों और मोबाइल की स्क्रीन में कैद हो गए हैं। परिणामस्वरूप रोग दबे पाँव आते हैं और देखते ही देखते नाक में दम कर देते हैं।

मैथिली में एक सुंदर उक्ति है—"देह नीक तऽ मन नीक, मन नीक तऽ सभ काज ठीक।" अर्थात शरीर स्वस्थ हो तो मन प्रसन्न रहता है, और मन प्रसन्न हो तो प्रत्येक कार्य सफल होता है। यही भारतीय जीवन-दर्शन का सार है।

योग, प्राणायाम और ध्यान भारत की अमूल्य धरोहर हैं। ये केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का विज्ञान हैं। "करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान"—यदि प्रतिदिन कुछ समय योग, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या को दिया जाए, तो अनेक रोग स्वयं दूर हो जाते हैं।

स्वास्थ्य केवल शरीर की शक्ति नहीं, बल्कि मन की पवित्रता भी है। क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, चिंता और तनाव ऐसे अदृश्य शत्रु हैं जो मनुष्य को भीतर से खोखला कर देते हैं। इसलिए स्वस्थ जीवन का अर्थ केवल पौष्टिक भोजन नहीं, बल्कि मधुर वाणी, सकारात्मक विचार और संयमित आचरण भी है।

आज का सबसे बड़ा संकट यह है कि मनुष्य धन कमाने की दौड़ में अपने स्वास्थ्य को ताक पर रख देता है। फिर जब अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तब समझ आता है कि वर्षों की कमाई एक बीमारी पर पानी फिरने में देर नहीं लगती। सच तो यह है कि स्वास्थ्य का कोई विकल्प नहीं।

फिट इंडिया केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जीवन जीने की संस्कृति है। इसका उद्देश्य है—हर नागरिक को यह स्मरण कराना कि राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी स्वस्थ जनता में निहित है। स्वस्थ नागरिक ही स्वस्थ परिवार, सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करते हैं।

अंत में केवल इतना कहना चाहूँगा—

आरोग्यं परमं धनं, नास्ति तस्मात् परं सुखम्।
स्वस्थ तन, निर्मल मन, यही जीवन का सच्चा यश है।

आइए, हम आज यह संकल्प लें कि सफलता की दौड़ में अपने स्वास्थ्य को कभी पीछे नहीं छोड़ेंगे। क्योंकि स्वास्थ्य ही सुख का आधार है, और यही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी, सबसे बड़ा सौभाग्य तथा सबसे अनमोल उपहार है।

+91 96919 16636
श्री कुमार गुप्ता 
सरकंडा बिलासपुर

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ