आप का इस बेवसाइट पर स्वागत है। साहित्य सरोज पेज को फालो करें( https://www.facebook.com/sarojsahitya.page/
चैनल को सस्क्राइब कर हमारा सहयोग करें https://www.youtube.com/channe /UCE60c5a0FTPbIY1SseRpnsA
घर में मातम सा छाया था डाइगं रुम में ख़ामोशी छाई थी लग रहा था अभी अभी बहुत बडी दुर्घटना हुई हो, कोई किसी के साथ बात नही कर रहाँ था , तभी घर की बेटी दामाद आ कर बोले क्या बात है मम्मी -पापा इतनी ख़ामोशी क्यो और आपने तुरंत क्यो बुलाया -तभी रश्मि के पापा बोल पड़े बैठो बेटा , मैने सबको इस लिये बुलाया है की तुम लोगो की मम्मी मुझे तलाक़ देना चाहती है और दुसरी शादी करना चाह रही है , पच्चास साल की उम्र में शादी डाँट काम में रजिस्टर कराया है अपने लिये नया जीवन साथी तलाश रही है , रोज प्रोपोज़ल आ रहे है मुझे बताती है , आपसब बताओ मैने क्या कभी तुम्हारी माँ को प्यार नही किया।
मैं मानता हूँ मैने बहुत गल्तियां की है पर क्या तलाक़ देना उचित है ,बच्चे समझदार थे बेटा , बहू , बेटी , दामाद , सबने माँ को अलग लेजा कर पूछा माँ इस उम्र में आप यह क्या कर रही है , माँ ने रोते हुये कहाँ उम्र क्या उम्र सारी उम्र तुम लोगो को बडा करने में शादी करने मे ख़र्च कर दिये पर अब तो मेरी जिंदगी मेरी है कि नही मुझे खुश रहने का हक़ है या नही ? सब एक साथ बोल पड़े है है माँ तब क्यो मना कर रहे है मुझे तलाक़ देने से आपके पापा मेरे साथ ढंग से बात नही करते बात बात में चिल्लाते , मुझ से कोई मतलब नही तो क्यो मैं यहाँ रहू कुछ साल में उस आदमी के साथ बिताऊँ जिसे मेरी जरुरत हो जो मुझसे ढंग से बात तो करे मैने अपने लिये नया जीवन साथी ढूँढ लिया है अब आपके पापा मुझे तलाक़ दे या न दे मैं घर से जा रही हूँ , तभी रश्मि के पापा सबके सामने कान पकड़ कर माँफी माँगने लगे और कहने लगे मैने बहुत तकलीफ़ दी है तुम्हे माफ कर दो
अब नही अब बहुत प्यार से रखूगा तुम्हारे बिना यह घर घर नही है आज से जैसा तुम चाहोगी वैसा करुगा , प्लीज़ छोड कर मत जाओ बच्चो ने भी बहुत आग्रह किया तो कम्मो ने बच्चो को गले लगा कर कहाँ तुम्हारे पापा को सबक़ सिखाना बहुत जरुरी था
बस और कुछ नही ।
डॉ अलका पाण्डेय -मुम्बई
देविका रो हाऊस प्लांट न.७४ सेक्टर १
कोपरखैराने नवि मुम्बई च४००७०९
मो.न.९९२०८९९२१४
ई मेल alkapandey74@gmail.com
0 टिप्पणियाँ