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इस तरह से मिलते है वो हमसे
जैसे कभी वो जुदा ना होंगे
उन्हें क्या बताएं अपना गम ए दिल
जमी पर कभी वो सितारे ना होंगे
उनकी शख्शियत में खुद को मिटा तो दू
पर दिल को हमारे सहारे
न होंगे
बर्बाद ए मुकद्दर की तहरीर में
वो हमारे हमसफर
ना होंगे
जुल्म ओ सितम के जहान में
दो पल सुकू के ना होंगे
चरागों को रोशन कर तो दे शमा
पर ऐसे अब परवाने ना होंगे
महफिलों में हँसते है जो रीता
उनके दर्दे ए अलम के पैमाने ना होंगे
डॉ रीता शर्मा विदिशा
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