चमत्कारी बर्फ़बारी-कान्‍ता अग्रवाल



आप का इस बेवसाइट पर स्‍वागत है।  साहित्‍य सरोज पेज को फालो करें https://www.facebook.com/sarojsahitya.page/
चैनल को सस्‍क्राइब कर हमारा सहयोग करें https://www.youtube.com/channe /UCE60c5a0FTPbIY1SseRpnsA




हाड़ों पर छुट्टियां मनाने का अपना अलग ही आनंद होता है ।ऊँचे पहाड़ों पर हर मौसम में अलग -अलग तरह का नज़ारा देखने को मिलता है ।हिमाचल में मनाली हमारे लिए एक ख़ास आकर्षण का केंद्र है ।हम प्राय हर मौसम में वहाँ की यात्रा कर चुके हैं।जाड़ों के मौसम में बर्फ़/बर्फ़बारी का अतुल्य आनंद हर बरस हमें वहाँ खींच के ले जाता है ।कभी जमी हुई बर्फ़ पर खेलना तो कभी बर्फ़ की बारिश में भीगना,कभी कल-कल बहती नदियों का शोर सुनना और उसमें वाटर राफ्टिगं करना,कभी सेवों  से लदी हरी-भरी घाटी तो कभी ठूँठ से खड़े पेड़ और शान्त पथरीले पहाड़ ।

                 हम अक्सर ऑफ़ सीज़न में पर्यटन पर जाना पसंद करते हैं क्योंकि भीड़ -भाड़ थोड़ी कम होती है ।दिसंबर और जनवरी के महीने में बर्फ़बारी कई बार हमें मिल चुकी है। बर्फ़बारी में  भीगने का सम्मोहन हमें इतना ज़्यादा है कि बस जैसे ही न्यूज़ से पता चलता है कि वह बर्फ़बारी शुरू होने वाली है,हमारी मनाली जाने की तैयारी शुरू हो जाती है ।बर्फ़बारी होने के लिए कुछ  ख़ास तरह की कंडीशन होती है।और मौसम विभाग का एक तरह का आप बोल सकते हैं ,पूर्व अनुमान होता है उसके साथ वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की कुछ गणना के हिसाब से बरफबारी का अनुमान किया जा सकता है ।मेरी पति ने  इस तथ्य की इतनी खोज/शोध की है कि अब वो इस गणना के विशेषज्ञ बन चुके हैं । और वे इसके हिसाब से मनाली /किसी भी पहाड़ी स्थान ,पर जाने का कार्यक्रम तय करते है ।पिछली बार 2018  की बात है  अक्टूबर माह के आरंभ में ही मेरे पाँव में फ्रैक्चर हो गया था जिसकी वजह से हम दिसंबर और जनवरी में मनाली जाने का कार्यक्रम नहीं बना सके ।फ़रवरी में भी क्योंकि ठण्ड थी और  मेरे पाँव में थोड़ा आराम भी था ,तो मनाली जाने का कार्यक्रम किया और इनकी गणना के अनुसार उन चार दिनों में वहाँ पर बर्फ़बारी होना तय था तो हम चल पड़े ढेर सारे ठण्ड के कपड़े ,टोपी , बूट्स    और  ,मन में सुनहरे  ख़्वाब  लेकर गुवाहाटी से दिल्ली , फिर दिल्ली से हमारी परमानेंट गाड़ी और ड्राइवर को लेकर चंडीगढ़ और चंडीगढ़ से  बढ़ चलें मनाली की ओर और पूरे रास्ते हम बारिश का इंतज़ार करते रहे कि शायद  आगे जाकर हमें मनाली में बर्फ़ मिल जाए ,बर्फ़बारी मिल जाए, परंतु हमें बारिश की एक बूँद भी नहीं मिली ।आखिरकार हम मनाली पहुँच गए । 

रात गहरा चुकी थी और हम लंबी यात्रा से थक चुके थे सो अगले दिन के लिए नई स्फूर्ति के साथ घूमने के लिए खाना खाकर सोने चले गए। अगली सुबह जल्दी जल्दी उठकर तैयार हुए और बर्फ़बारी होने का इंतज़ार करने लगे परंतु ये क्या ? वहाँ तो चारों ओर सूखा नज़र आ रहा था ।फ़रवरी की सूखी हवाएँ ,न कोई हरियाली ,सूखी हुई नदियाँ ,सूखे -सूखे से रास्ते ,हर एक चीज़ फीकी-फीकी नज़र आ रही थी ।हमें बहुत निराशा हुई क्योंकि हम तो सिर्फ़ स्नोफॉल देखने आए थे ,बाक़ी सारे स्पोट्स हमारे कई बार देखे हुए थे ।हमने सोचा इतनी दूर से ही हम इतनी मेहनत करके यहाँ आए पर यहाँ तो इस बार देखने को कुछ भी नहीं है ।

यहाँ तक कि वहाँ के जो स्थानीय लोग थे उनसे भी बात करके भी ऐसा लग रहा था कि बर्फ़बारी तो होने का कोई चांस है नहीं और मैं क्योंकि फ़रवरी के महीने में मनाली आना नहीं चाहती थी तो मुझे लगा कि हमने इतना  समय और पैसा जाया किया और देखने को तो कुछ भी नया नहीं मिला ।परंतु मेरे पति को पूरा विश्वास था कि बरफबारी होगी ज़रूर । 2 दिन बीत चुके थे और हम बार -बार बोल रहे थे के मनाली से निकल पड़ते हैं कहीं और चलते हैं ,सारा माहौल बड़ा अजीब सा हो चुका था ।हम बार बार मौसम विभाग का पूर्वानुमान को देखते पर उसमें कहीं ऐसी कोई सूचना नहीं थी बर्फ़बारी होने की ।पर इन को दृढ़ विश्वास था कि बरफबारी होगी ।हम उनका मन रखने के लिए ही ,वो जो हमें दिखाते थे कि -‘वो देखो दूर से जो बादल दिखाई दे रहे हैं न बस ये बादल थोड़े और सघन होगें , सारे पहाड़ों को ढक लेंगे और बर्फ़बारी हो जाएगी ।’मैं और मेरी बेटी एक -दूसरे की तरफ़ देखते और हमें लगता कि होना तो नहीं है पर मन रखने के लिए बोल देते कि -‘हाँ -हाँ होगा ।’

उस रात हम सब पूरी रात नहीं सोए ,इस आशा में कि बर्फ़बारी अगर रात को होती है तो कहीं ऐसा न हो कि हम सोए रह जाएँ।बार बार हम खिड़की के बाहर देखते रहते शायद कुछ बूंदें आ रही हों हमारी तरफ़,ऐसे करते -करते सुबह हो गई ।

बर्फ़बारी होने से पहले बारिश होनी पड़ती है , तो जब बारिश ही नहीं हुई थी तब बर्फ़बारी होने की तो कोई गुंजाइश ही नज़र नहीं आ रही थी । तो हमने सोचा कि चलो अब हिडिंबा टेम्पल चले जाते हैं ।हम दूर गुलाबो गए तो वहाँ  जो बरफ मिली वह पहले भी देख चुके थे हमें इतना मज़ा नहीं आ रहा था । 

मेरे पति बार बार आसमान की तरफ़ दूर से आते हुए बादल हमें दिखाते और कहते कि -‘ ये घने हो जाएंगे और हमें बर्फ़बारी मिलेगी ‘। हमें विश्वास न होते हुए भी हम सिर्फ़ उनकी हाँ में हाँ मिला रहे थे पर उनका पूरा का पूरा ध्यान हर वक़्त सिर्फ़ दूर से आते बादलों पर और अपने बर्फ़बारी होने के विश्वास पर टिका था।फिर भी बस आज का ये अंतिम दिन था हमारा मनाली में । कल हमें वापस लौट जाना था ख़ाली हाथ।                

हिडिम्बा टेंपल की ओर गए तो वहाँ जाते ही अचानक से बारिश शुरू हो गई परंतु थोड़ी  सी बारिश से वहाँ तापमान इतना कम नहीं हो पाता कि वो बर्फ़बारी में बदल सके ।थोड़ी ठंड बढ़ गई तो हम वहाँ से लौटने लगे हमने कहा बारिश है तो लौट जाते हैं परंतु देखा कि बारिश की बूंदें थोड़ी कम हो गई है । फिर से आशा की किरण बुझने लगी।  तो हम सब खाना खाने के लिए रेस्तरां में चले गए । हमारी नज़र अब भी बादलों पर और किसी चमत्कार की आशा में थी । हम मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि हे भगवान कल जाने से पहले एक बार तो स्नोफॉल दिखा दें जिससे हमारा आना सफल हो जाए। हमने खाना खाया और ज्यूँ ही  हमारा खाना ख़त्म हुआ हमारे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब हमने देखा बाहर  कुछ छोटे -छोटे रूई के फाहे से गिरते हुए दिखे ।हमारी आँखों को यक़ीन नहीं हो रहा था और हम एक - दूसरे को दिखा कर यक़ीन कर रहे थे कि  जो कुछ दिख रहा है वो हम सबको दिख रहा है और हमारी कोरी कल्पना नहीं है बस हमारी कोरी कल्पना नहीं है ।बसफिर  जब पूरी तसल्ली महुई कि हाँ थोड़ी -थोड़ी स्नोफॉल शुरू हो गई है तो हम ख़ुशी के मारे दौड़ कर बाहर गए । बर्फ़बारी शुरू हो चकी थी ,ये बिलकुल बिन मौसम बरसात वाली बात थी ।किसी भी इंसान को भरोसा नहीं था कि इस मौसम में बर्फ़बारी हो सकती है परंतु उस दिन हमें विश्वास हो गया कि -‘शिद्दत से किसी चीज़ को चाहो तो ज़रूर मिलती है ।और भरोसा हो तो न सिर्फ़ पहाड़ को हिला सकते हैं बल्कि बर्फ़बारी भी लाई जा सकती है ‘😊सच में वो चमत्कार था ।

शायद कई महीनों से जो हमारे मन की चाहत थी ,  उसे इस प्रकृति ने सुन लिया था और फिर तो जमकर लगातार एक घंटे तक बर्फ़बारी चलती रही और हम दोनों हाथ ऊपर उठा कर उस ऊपर वाले के चमत्कार के आनंद को लेते रहे ,लेते ही रहे , रोमांचित होते रहे। हमने ढेर सारी फ़ोटो ली ,वीडियोज बनाए ,नाचे और दिल में उस सुंदरता को भर लिया ,आँखों में आसमान से बरसती हुई धुनि हुई रूई के नजारे  को हमने क़ैद किया। उस  दिन मुझे सच में यक़ीन हो गया चमत्कारों पर ,भगवान पर । आस्था और मज़बूत हुई ,फिर हम ढेर सारी सुहानी यादों के साथ पूरी तरह से संतुष्ट होकर अगले दिन मनाली से रवाना हुए..

 

कान्ता अग्रवाल 

गुवाहाटी

 


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ