गुजरात के डांग जिले स्थित सूर्या आर्ट गैलरी, गांधर्वपुर आर्टिस्ट्स विलेज, सपुतारा में नेशनल आर्टिस्ट्स एसोसिएशन द्वारा १८ से २० सितंबर २०२६ तक राष्ट्रीय कला शिविर ‘वर्षा २६’ का सफल आयोजन किया गया। मानसून की धुंध, पहाड़ियों और प्राकृतिक वातावरण के बीच आयोजित इस शिविर में ८ राज्यों के १० शहरों से करीब २० कलाकारों ने भाग लिया।
शिविर का क्यूरेशन वरिष्ठ कलाकार एवं क्यूरेटर अतुल पाडिया (वडोदरा) और प्रबुद्ध घोष (पुणे) ने किया। ‘वर्षा’ इसकी केंद्रीय अवधारणा रही, लेकिन कलाकारों को अपनी स्वतंत्र कला-दृष्टि और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के साथ काम करने की स्वतंत्रता दी गई। इसमें छत्तीसगढ़ की सीमा भारती; गुजरात के अजित पटेल, अंजुम मीर, चंद्रशेखर पाटील, डॉ. पंकज मालूकर, संजीवनी चौधरी, विजय कच्छिया और विक्रम पांड्या; मध्य प्रदेश की अनामिका कुंडवानी; महाराष्ट्र के हितेंद्र गवाड़े और प्रबुद्ध घोष; नई दिल्ली की रूपाली शर्मा; राजस्थान की डॉ. नीलू शर्मा; उत्तर प्रदेश की रेणु पंजवानी तथा पश्चिम बंगाल के जयंत खान, सहित अन्य कलाकारों ने भाग लिया।
शिविर के साथ दो समानांतर प्रदर्शनियां भी आयोजित हुईं। वडोदरा के बहुआयामी कलाकार चंद्रशेखर पाटील ने ड्रॉइंग एवं पेंटिंग तथा प्रसिद्ध स्त्रीरोग विशेषज्ञ और शौकिया पायलट डॉ. पंकज मालूकर ने फोटोग्राफी प्रस्तुत की। दोनों प्रदर्शनियों को गुजरात ललित कला अकादमी का सहयोग प्राप्त हुआ। पाटील ने स्मृतियों, भावनाओं और रोजमर्रा की सामान्य वस्तुओं के प्रति अपने जुड़ाव को अभिव्यक्त किया, जबकि डॉ. मालूकर ने ‘बिग कैट्स’ (बड़ी बिल्लियाँ) और अन्य वन्यजीवों के साथ अपने निकट अनुभवों की फोटोग्राफिक यात्रा प्रस्तुत की।
क्यूरेटर अतुल पाडिया ने कैनवास पर आधुनिक कला के सृजन और उसके उद्देश्य की व्यावहारिक प्रस्तुति दी। सह-क्यूरेटर प्रबुद्ध घोष ने ज्ञान-आधारित कला-दृष्टि और समकालीन सौंदर्यबोध पर चर्चा की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित कॉरपोरेट अर्थशास्त्री किरिट पटेल ने कलाकारों के साथ निरंतर संवाद करते हुए कला के उद्देश्य और व्यापक सामाजिक महत्व पर अपने विचार साझा किए तथा नेशनल आर्टिस्ट्स एसोसिएशन को आर्थिक सहयोग देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। कलाकार एवं फैशन प्रोफेशनल राम कृष्ण अग्रवाल ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया और भविष्य में एन ए ए के साथ जुड़कर कला, संस्कृति एवं विरासत के राष्ट्रीय प्रसार में सहयोग की इच्छा व्यक्त की।
शिविर में तैयार कलाकृतियों में घरेलू सज्जा, प्राकृतिक एवं शहरी दृश्य, आध्यात्मिकता और वैचारिक अभिव्यक्तियों की विविधता दिखाई दी। हितेंद्र गवाड़े ने शिक्षा के अपने पेशेवर अनुभव को ‘अक्षर’ की अवधारणा से जोड़ा, जयंत खान ने आतंकवाद-विरोधी चिंतन को अपनी कलायात्रा से जोड़ा और विक्रम पांड्या ने व्यक्तिगत संवेदनाओं के साथ शहर के दृश्यों को प्रस्तुत किया। अजित पटेल ने क्रेनों की जोड़ी, जबकि डॉ. नीलू शर्मा ने एकल क्रेन के माध्यम से अपनी खोज को अभिव्यक्त किया।
प्रबुद्ध घोष ने दो विपरीत किंतु पूरक कृतियां प्रस्तुत कीं—‘ फर्टिलिटी’ (उपजाऊपन) शीर्षक वाली कृतियां, जिनमें वर्षा ऋतु की उर्वरता को उनके विशिष्ट नियो-तांत्रिक दृष्टिकोण से अभिव्यक्त किया गया, तथा टेक्सचर और वातावरण पर आधारित एक सरल मोनोक्रोम वर्षा-दृश्य। इन विविध कृतियों ने एक ही मौसमी संदर्भ से अलग-अलग कलात्मक दृष्टियों के उभरने को रेखांकित किया।
शिविर और प्रदर्शनियों ने पर्यटकों, कला-प्रेमियों तथा नियमित दर्शकों को आकर्षित किया। समापन समारोह में वरिष्ठ कलाकार एवं सूर्या आर्ट गैलरी तथा गांधर्वपुर आर्टिस्ट्स विलेज के संस्थापक सूर्यकांत गोस्वामी ने शिविर की सफलता की घोषणा की। अतुल पाडिया ने प्रतिभागियों, संरक्षकों और दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया तथा प्रमाणपत्र वितरित किए।
‘वर्षा ’२६’ ने यह स्पष्ट किया कि कला शिविर केवल किसी एक विषय तक सीमित नहीं, बल्कि विविध अनुभवों, क्षेत्रीय पहचान, ज्ञान और समकालीन कला-भाषाओं के संवाद का माध्यम बन सकता है। मानसून यहां सीमा नहीं, प्रेरणा बना—जिसने प्रकृति, स्मृति, आध्यात्मिकता, शहरी जीवन और सामाजिक सरोकारों को अलग-अलग कलात्मक रूपों में सामने आने का अवसर दिया। सापुतारा में आयोजित यह पहल कला, संस्कृति और समुदाय के बीच संवाद को मजबूत करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर कलात्मक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक सहभागिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई।
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