पुलिस की सख्ती देख दीनू को ना चाहते हुए भी घर की ओर वापस लौटना पड़ा।सरकार ने इन लोगो की जान बचाने के लिए लाॅकडाउन लगाया है हमलोग अपनी जान खतरे में डाल ड्युटी कर रहे है और ये साहब लोग घरों में सुरक्षित रहने की बजाय सड़को पर मटरगश्ती करने में लगे रहते है।सिपाही लोग आपस में बड़बड़ाने लगे।
उनकी बात सुनकर दीनू पलट कर धीरे से बोला-साहेब घर में रहना और सुरक्षित रहना तब तक ही अच्छा लगता है जब तक बच्चों का पेट और रसोई में राशन भरा हुआ हो।हम तो दिहाड़ी मजदूर है सर रोज कुआँ खोदकर पानी पीने के लिए मशक्कत करना पड़ता है।
" तो क्या हम सब अंबानी और बिल गेट्स है।लाॅकडाउन से सरकार का अरबों रुपए का नुकसान हो रहा है। देश दुनिया की कुछ भी खबर है तुम्हें!कोरोना का नया भेरिएंट पुरे विश्व में फैल चुका है।ई जो गलथेथरी कर रहे हो, तनिक भी अंदाज है तुम्हे कि कितना खतरनाक है ये महामारी !" दीनू की बात सुनकर तैश में एक जवान फूट पड़ा।
"साहेब,कोरोना का तो पता नहीं किंतु इतना जरूर जानते है कि भूख और गरीबी से बढ़कर कोई महामारी नहीं है" इतना कह पीठ सहलाता दीनू धीमे कदमों से घर की ओर चल दिया।
2 प्रेस कांफ्रेंस (लघुकथा)
ग्रामीणों की भीड़ ने दिन के नौ बजे चोर को रंगे हाथ पकड़ा। सामूहिक पिटाई पर पता चला कि चोर एक लुटेरे रैकेट का सरगना है।उसके पास लूट की सैकड़ों मोबाइल,लैपटॉप और दर्जनों मोटरसाइकिल है जो उसने अपने घर के आसपास छिपा रखा है। ग्रामीणों की भीड़ के साथ चोर अपने घर पहुंचा जहाँ लूट और चोरी का सामान रखा था।
तब तक किसी ग्रामीण ने स्थानीय थाना को खबर कर दिया।दिन के बारह बजे पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर ग्रामीणों के चुंगल से बचाया और कानूनी औपचारिकता के नाम पर थाना ले जाने और आधे घंटे बाद वापसी में अभियुक्त के घर की तलाशी की बात कह अपने साथ लेकर चली गई।
ग्रामीण अभियुक्त के घर के बाहर इंतजार करती रही लेकिन पुलिस ना तो अभियुक्त को लेकर आई और ना ही ग्रामीणों की मौजूदगी में घर की तलाशी ली गई।
अगले दिन पुलिस की ओर से प्रेस कांफ्रेंस बुलाया गया। फिर तीसरे दिन अखबारों में काले कपड़े से चेहरा ढके अभियुक्त और उसके चारो ओर मुस्तैद पोज़ में खड़े पुलिस वालो की तस्वीर के साथ खबर आई "पुलिस की मुस्तैदी से
गश्ती के दौरान सरगना गिरफ्तार।लूट की तीन मोबाइल,एक बाइक और दो लैपटॉप बरामद"।

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