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सावन का महीना पवन करे शोर, हां बस ऐसा ही कुछ होता है हमारे मन पर भी जब सावन का महीना शुरू होता है। वह ठंडी ठंडी हवा का झोंका और रात रानी की महक घर आंगन में पसर ही जाती है पता ही नहीं चलता कब उदास सा मन हरियाली देखकर खिल उठा और बस यही चाहता है इस धरा की खूबसूरती की तरह हमारा जीवन भी हरा भरा हो जाए बस हम और हमारे मनमीत हो‌। थोड़ी देर के लिए ही सही हम अपनी उलझनों से बाहर निकले और प्रकृति की खूबसूरती में खो जाए जैसे सावन के आते ही कोयल बावरी हो कर कूकने लगती है और सबको बताती है अरे, सुनो वर्षा आने वाली है और बादलों के काले घेरे देखकर मयूर नाचने लगता है खुशी से वन में हम इंसान तो इंसान पशु को भी इस सावन का बेसब्री से इंतजार रहता है आसमान से गिरता पानी सही में बहुत अच्छा लगता है ऐसा लगता है प्रभु हम पर खुशियों की वर्षा कर रहा है दोनों हाथों से और कह रहा है समेट लो अपने आंचल में जितना समाए सावन का महीना सभी के लिए खुशियों भरा होता है इसके आने से प्रकृति भी सुंदर होती है और हमारा मन भी इस महीने को हम प्यार का महीना भी कह सकते हैं एक किसान को अपनी लहलहाती फसलों से प्यार होता है और यह तभी संभव हो सकता है जब अच्छी वर्षा हो वह अपनी दरार पड़ी धरती को जब-जब देखता है उसका मन दुखी होकर आसमान की तरफ निहारता है और जब वर्षा होती है तो उसका मन भी मयूर की तरह झूम उठता है क्योंकि जल है तो कल है ऐसा है प्यारा सावन का महीना और भक्ति का भी महीना भोलेनाथ का महीना सावन का महीना।


कंचन